मैं नीलन्द्री यादव, छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के गाँव डांगबंधी से हूँ। हमारा परिवार खेती पर निर्भर है—मौसम अच्छा रहा तो घर चलता है, नहीं तो उम्मीद के सहारे दिन कटते हैं। लेकिन हमारे घर की सबसे बड़ी परीक्षा खेतों में नहीं, मेरी बेटी की बीमारी में चल रही है।
मेरी बेटी सोनाली यादव (उम्र 14 वर्ष) को बचपन से ही रक्त से जुड़ी एक गंभीर समस्या है। जब वह सिर्फ 2 साल की थी, तभी से हमारी जिंदगी अस्पतालों, रिपोर्टों और इलाज के बीच फँस गई। कभी कमजोरी, कभी बार-बार तबीयत बिगड़ना, कभी इलाज की नई सलाह—हम हर बार उम्मीद लेकर दौड़ते रहे कि शायद अब सब ठीक हो जाएगा।
रायपुर के मेकाहारा हॉस्पिटल में जाँचों के बाद पता चला कि सोनाली को मेजर थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी है। डॉक्टरों ने साफ बताया कि जो इलाज अभी चल रहा है, वह सिर्फ अस्थायी सहारा है—असल और स्थायी समाधान बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) ही है। यह सुनकर दिल घबरा गया, पर एक माँ/पिता के लिए उम्मीद छोड़ना भी तो आसान नहीं होता।
बेहतर इलाज के लिए हमने बैंगलोर के नारायणा हॉस्पिटल से परामर्श लिया। वहाँ डॉक्टरों ने भी कहा कि सोनाली के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया आवश्यक है। लेकिन साथ ही उन्होंने जो खर्च बताया, उसने हमें अंदर से तोड़ दिया—हॉस्पिटल के मेडिकल एस्टिमेट के अनुसार इलाज का कुल संभावित खर्च लगभग ₹42,30,000 है।
हमारी आय कृषि आधारित है, और सोनाली के वर्षों से चल रहे इलाज ने हमारे संसाधन लगभग समाप्त कर दिए हैं। हमने जितना हो सका किया—बचत, उधार, मदद… पर अब इस बड़े इलाज के लिए हमारे पास पर्याप्त साधन नहीं बचे। और सबसे बड़ा डर यह है कि अगर समय पर ट्रांसप्लांट नहीं हो पाया, तो सोनाली के स्वास्थ्य पर गंभीर और अपूरणीय प्रभाव पड़ सकता है।
आज मैं आप सबसे एक विनम्र अनुरोध कर रही/रहा हूँ—कृपया इस चिकित्सा आपात स्थिति में सोनाली की मदद करें। आपकी छोटी सी सहायता भी इस इलाज को आगे बढ़ाने में हमारे लिए बहुत बड़ा सहारा बनेगी। अगर आप आर्थिक मदद नहीं कर सकते, तो कृपया इस अपील को शेयर जरूर करें—क्योंकि किसी एक शेयर से भी सही मदद सही समय पर मिल सकती है।
सोनाली सिर्फ हमारी बेटी नहीं—हमारी पूरी दुनिया है।
कृपया सहयोग करें, ताकि हम उसे एक स्वस्थ जीवन दे सकें।
