मैं अमित तिग्गा, जशपुर जिले के छोटे से गाँव कोतबा का रहने वाला हूँ। खेती ही मेरी दुनिया है—उसी से घर चलता है, उसी से बच्चों की पढ़ाई और रोज़मर्रा की जरूरतें पूरी होती हैं। मैं कभी किसी के सामने हाथ फैलाने वाला आदमी नहीं था… लेकिन आज एक पिता के रूप में मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।
मेरा बेटा अनीश तिग्गा, उम्र 12 साल, पिछले करीब 8 महीनों से लगातार बीमार रहने लगा। पहले लगा कि शायद सामान्य कमजोरी होगी—दवा, जाँच, आराम… सब किया। पर धीरे-धीरे उसकी थकान बढ़ती गई, शरीर जवाब देने लगा, और घर की चिंता में मेरी रातों की नींद खत्म हो गई। आखिर हम उसे रायपुर के मेकाहारा हॉस्पिटल लेकर गए। जाँच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि अनीश को मेजर थैलेसीमिया है। यह सुनते ही मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई।
डॉक्टरों ने साफ कहा—इस बीमारी का स्थायी इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) ही है। उम्मीद की आखिरी डोर पकड़कर हमने बेहतर इलाज के लिए बैंगलोर के नारायणा हॉस्पिटल से संपर्क किया। वहाँ भी डॉक्टरों ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट की पुष्टि की। लेकिन साथ ही जो बात उन्होंने कही, उसने मुझे अंदर से तोड़ दिया—इलाज का अनुमानित खर्च लगभग ₹31,80,000 है।
मैं एक छोटा किसान हूँ। मेरी कमाई सीमित है, और घर की जिम्मेदारियाँ बड़ी। मैंने जितना हो सका किया—उधार, मदद, अपनी सारी कोशिशें… पर सच यह है कि इतनी बड़ी रकम जुटा पाना मेरे लिए अकेले संभव नहीं है। और सबसे दर्दनाक बात यह है कि समय पर इलाज न हुआ तो मेरे बेटे की जान खतरे में पड़ सकती है।
आज मैं आपसे एक पिता बनकर विनती कर रहा हूँ—कृपया मेरे बेटे अनीश की मदद कीजिए। आपका छोटा सा योगदान भी उसके इलाज में बड़ा सहारा बनेगा। अगर आप आर्थिक मदद नहीं कर सकते, तो कृपया इस अपील को अधिक से अधिक लोगों तक शेयर कर दीजिए—क्योंकि किसी एक शेयर से भी वह इंसान तक बात पहुँच सकती है जो अनीश को जीवनदान दे सके।
मेरे लिए अनीश सिर्फ एक बच्चा नहीं—मेरी उम्मीद है, मेरी दुनिया है। मैं उसे खो नहीं सकता।
कृपया मदद करें। दान करें। और शेयर करें।
आपका सहयोग हमारे परिवार के लिए आशा की सबसे बड़ी किरण है।
